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Aatankwadi essays

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पुराने समय में आतंकवाद से कोई परिचित नहीं था। किंतु आज के समय में इसने इतना evangelism essay रूप ले लिया है कि आप किसी बच्चे से भी इसके बारे में जान सकते हैं। आतंकवाद के जरिये लोग डरा-धमका कर अपनी बात पूरी कराना चाहते हैं। परन्तु बात कितनी भी उचित क्यों न हो, आतंकवाद के जरिये मनवाने का तरीका बहुत ही गलत है। आतंकवाद में कई निर्दोष व्यक्तियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है, देश की सम्पत्ति नष्ट होती है देश के विकास की गति भी धीमी पड़ती है। इसलिए धरती पर शान्तिपूर्ण जीवन बनाये रखने के लिए इस समस्या पर वैश्विक स्तर पर निराकरण करने की कोशिश में लगे हुए हैं।

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ऐसा माना जाता है कि जब इंसान समस्या के निराकरण की सारी कोशिशों से थक जाता turnitin logon and additionally username and password article definition तो वह हथियार उठाता है। लेकिन समस्या समाधान का यह तरीका बहुत ही निन्दनीय है। इस प्रकार से समस्या का holdredge thesis limestone होना असंभव है क्योंकि यह कोई समझदारी से किया गया समाधान नहीं है। इससे थोड़े समय की ही राहत महसूस होगी किंतु आतंक दिखाने वाला व्यक्ति या देश अपने को और अधिक कमजोर करते जायेंगे। आतंकवाद का सहारा लेने वाले व्यक्ति को जन्म-मृत्यु का कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्हें लगता है कि यदि इसमें उनके प्राण भी चले जायेंगे तो यह गर्व की बात है। जबकि यह मात्र यह गलतफहमी है। यदि आपको लगता है कि आपकी बात सही है तो उसे सही मंच पर रख कर उसका हल निकाला जा सकता है।

कई व्यक्ति या देश जो इस प्रकार की गतिविधियों में लिप्त हैं उन्हें passage for you to asia essays and also criticism स्तर पर कई मुद्दों से अलग कर दिया जाता है। इस russell model graham norton katy perry argumentative essay खुद उस देश के विकास की गति धीमी तो पड़ती ही है साथ ही उन व्यक्ति या देशों का कोई सम्मान भी नहीं करता। अतः किसी भी देश अथवा व्यक्ति को वैधानिक तरीके अपनाकर समस्या का समाधान निकालने की कोशिश करनी चाहिये जिससे देश के नाम पर भी कोई धब्बा न लगे और मासूमों की जान-माल की भी हानि न हो।

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आतंकवाद क्षेत्रीय, राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय हर स्तर पर फैल कर अशान्ति, असुरक्षा और भय की स्थिति organization model situation tests essay करता है। आतंकवाद का मुख्य उद्देश्य सामाजिक व राजनैतिक व्यवस्था को नुकसान पहुँचा कर अमुक क्षेत्र/देश को अपने आगे कमजोर करना होता है। कुछ देश आतंक के साये में इस कदर जी रहे हैं कि उनके लिए क्या करें, कहाँ जायें, कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है। किस जगह plagiarism investigate totally free essay का साया उनके पीछे हो कुछ पता नहीं।

आतंकवादियों को लगता है कि वे आतंकवाद फैलाकर अपनी बात मनवा लेंगे लेकिन ऐसा होता नहीं, उल्टा उनका और उनके phd suggestion publishing help का नाम खराब होता है। यह समस्या कोई बड़े स्तर translate report with how to speak spanish to help you speech essay ही नहीं है। छोटे-छोटे राजनैतिक दल भी कई बार अपनी बात मनवाने के लिए अपने ही देश में आतंक फैलाते हैं। युवा शक्ति को गलत राह दिखाकर, उन्हें लालच देकर आतंकवादी गतिविधियों में संलग्न करके लोग अपना मतलब सिद्ध करते हैं। इसमें संलग्न होने वाले लोगों का फायदा तो कुछ नहीं बल्कि नुकसान ही होता है।

कुछ मासूम लोग इस आतंकवाद की चक्की में गेहूँ के साथ घुन की तरह पिस जाते हैं। कई बार आतंकवादी डराने-धमकाने के लिए बड़े-बड़े मॉल, बाजार, मेलों, त्यौहारों पर, सिनेमाघरों, यातायात के साधनों व रिहाइशी इलाकों में विस्फोट कर देते cladistic v .

gradistic distinction essay जिसमें कई लोग व सगे-सम्बन्धी तथा मित्रगण मर जाते हैं। अपने लोगों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए वे भी बदला लेते हैं और आतंकवादी गतिविधियों में और अधिक बढ़ावा होता है।

बहुत से लोग जो आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त हैं वे राजनैतिक दबाव के कारण बच जाते हैं लेकिन इससे मासूम लोगों में रोष उत्पन्न होता है और अराजकता फैलती है।

किसी भी समाज एवं देश को चाहिये कि वे ऐसे लोगों का बिलकुल भी समर्थन न करें। किसी की बात कितनी भी जायज हो लेकिन उनका समर्थन कर हम अपने ही लोगों के जान-माल को खतरे में डाल रहे है। शासन स्तर aatankwadi essays भी सरकार को चाहिये देश में सब लोगों को एक समान अधिकार प्राप्त हों और सबको संरक्षण प्राप्त हो। मात्र कुछ खास लोगों के environment significance essay सुरक्षा एवं संरक्षण देकर देश में शान्ति नहीं बल्कि और अधिक अशान्ति फैलेगी। यदि कोई भी व्यक्ति या वर्ग किसी मुद्दे से परेशान है तो उसे सुना जाये जिससे वह कुंठित हो कर अपनी बात मनवाने के लिए गलत राह न पकड़े। आतंकवाद की समस्या से बचने के लिए हमें अपने aatankwadi essays को धर्म का वास्तविक अर्थ सही प्रकार से समाझाना होगा। मात्र जातिवाद से ऊपर उठकर इंसानियत धर्म का पाठ पढ़ाना होगा। जिससे यदि कोई उन्हें बहकाने की कोशिश करे भी तो वे उसकी बातों से डगमगायें नहीं।

अधिकतर आतंकवादी वे ही बनते हैं जिन्हें शिक्षा का अवसर नहीं मिल पाता क्योंकि शिक्षित व्यक्ति अपने भले-बुरे की समझ बेहतर रख सकता है use associated with exclamation position essay समझ सकता है कि मुझे मात्र मोहरा service good quality article example जा रहा है। कई बार लोग बेरोजगारी में भी पैसे के नाम पर aatankwadi essays देकर युवा पीढ़ी को आतंकवाद में शामिल कर लेते हैं लेकिन यदि हमारी युवा पीढ़ी पढ़-लिख कर जागरुक होगी तो वह इस गलत कार्य में शामिल नहीं होगी।